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कुशीनगर में बिना नंबर प्लेट के फर्राटा भर रहीं नगर पालिका की गाड़िया

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नियमों का पाठ पढ़ाने वाले जिम्मेदारों के सामने से बेखौफ रोजाना गुजरती है दो दर्जन से अधिक बिना नंबर प्लेट की चार पहिया गाड़ियां।

गांधी चौक पर हर वक्त तैनात रहते हैं ट्रैफिक और स्थानीय पुलिस के जिम्मेदार, फिर भी कुंभकर्णी नींद सो रहा पूरा प्रशासनिक तंत्र।

मोहम्मद नईम

कुशीनगर। जनपद से एक ऐसी प्रशासनिक लापरवाही और दोहरे चरित्र का मामला सामने आया है जो कानून के रखवालों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। एक तरफ जहां सरकार और प्रशासन सड़क सुरक्षा तथा यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद सरकारी तंत्र के भीतर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कुशीनगर नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में दो दर्जन से अधिक चार पहिया वाहन बिना नंबर प्लेट के शहर की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। गंभीर बात यह है कि जनता के लिए कड़े नियम बनाने और मामूली चूक पर भारी-भरकम जुर्माना वसूलने वाली पुलिस और परिवहन विभाग की नजरों के सामने से ये अवैध गाड़ियां रोजाना गुजरती हैं, लेकिन मजाल है कि कोई इनका चालान काटने या अन्य कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा सके।

 जिम्मेदारों की आंखों के सामने बेखौफ दौड़ रहा नियमों का उल्लंघन:-

शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे खुद इस गंभीर अनियमितता के मूकदर्शक बने हुए हैं। स्थिति यह है कि नगर पालिका की दो दर्जन से अधिक चार पहिया गाड़ियां बिना किसी वैध नंबर प्लेट के शहर के प्रमुख मार्गों पर फर्राटा भर रही हैं। इन वाहनों का उपयोग मुख्य रूप से कूड़ा उठाने, उसकी ढुलाई करने, विभिन्न वार्डों में निर्माण सामग्री पहुंचाने और अन्य विभागीय कार्यों के लिए किया जाता है।

शहर का सबसे व्यस्त और प्रमुख केंद्र 'गांधी चौक' हमेशा पुलिस छावनी की तरह मुस्तैद रहता है। यहां हर वक्त ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय थाने के जिम्मेदार अधिकारी व सिपाही तैनात रहते हैं। इसके अलावा परिवहन विभाग की टीमें भी समय-समय पर चेकिंग अभियान का दावा करती हैं। गोरखपुर, देवरिया, सपहा और पडरौना की तरफ जाने वाले हर छोटे-बड़े वाहन को इसी चौराहे से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद, जब नगर पालिका के ये नंबर विहीन वाहन इन चौराहों से गुजरते हैं, तो तैनात सुरक्षाकर्मी या तो मुंह फेर लेते हैं या फिर जानबूझकर अनजान बन जाते हैं। नियम विरुद्ध इन वाहनों को रोकने, सीज करने या मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई। यह पूरी तरह से स्पष्ट करता है कि जिम्मेदारों के नाक के नीचे कानून का किस प्रकार मखौल उड़ाया जा रहा है। ​आखिर ऐसा क्यों है कि एक आम नागरिक यदि अपनी बाइक या कार पर हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट या सामान्य नंबर प्लेट भी नियमानुसार न लगाए, तो उसे चौराहे पर रोककर तुरंत हजारों रुपये का चालान थमा दिया जाता है, जबकि सरकारी वाहन इस कानूनी बाध्यता से पूरी तरह परे नजर आते हैं? क्या सरकारी विभागों और उनके वाहनों के लिए देश का मोटर व्हीकल एक्ट लागू नहीं होता? अधिकारियों की इस लंबी खामोशी और निष्क्रियता से यह साफ जाहिर होता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।


ईओ को है अवैध संचालन की पूरी जानकारी:-

इस पूरे प्रकरण का सबसे निराशाजनक और चिंताजनक पहलू यह है कि यह कोई छुपा हुआ या अनजाना मामला नहीं है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को इस अवैध संचालन की पूरी और पुख्ता जानकारी है। गाड़ियां रोजाना कार्यालय परिसर से निकलती हैं और वापस वहीं लौटती हैं, अधिकारियों की नजरों के सामने से गुजरती हैं, फिर भी आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इन वाहनों को नियम के तहत चलने की कोई पहल नहीं की।

आम जनता के लिए बना है कानून का चाबुक:-

जब शासन और प्रशासन खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाने पर उतारू हो जाए, तो आम जनता से यातायात नियमों के पालन की उम्मीद करना पूरी तरह बेईमानी होगी। कुशीनगर की सड़कों पर चल रहे इस दोहरे रवैये ने आम नागरिकों के बीच भारी चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता के बीच अब यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या कुशीनगर में कानून सिर्फ गरीबों, कमजोरों और आम आदमियों के उत्पीड़न के लिए ही बना है? क्या रसूखदार और सरकारी महकमों के लिए कानून के मायने पूरी तरह बदल जाते हैं? बिना नंबर प्लेट के चलने वाली इन गाड़ियों से यदि कल को कोई दुर्घटना हो जाती है या कोई वाहन किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? बिना नंबर के इन वाहनों की पहचान करना सीसीटीवी कैमरों या आम आदमी के लिए असंभव हो जाता है, जो कि एक बहुत बड़ा सुरक्षा खतरा भी है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और लाजिमी होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्या शासन -प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटेगी, या फिर बिना नंबर प्लेट के दौड़ती ये गाड़ियां यूं ही तंत्र के मुंह पर तमाचा मारती रहेंगी।

 एआरटीओ बोले:-

इस संबंध में जब एआरटीओ दिलीप कुमार गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यदि ऐसा है तो यह नियम विरुद्ध है, प्रत्येक गाड़ी पर उसका पंजीयन चिन्ह लगाना अनिवार्य है। अगर कोई वाहन इस तरह संचालित हो रहा है तो यह जांच का विषय है, ऐसे वाहन सड़क पर पाया जाता है तो उसपर कार्यवाही की जाएगी।

 

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